साल नया उल्लास नया
तोड़ तम की निशा को
चमका है प्रकाश नया
उम्मीदों का दामन थाम
जीवन पथ पर बढ़ते जाएंगे
रहे ना कोई बैर पुराना
ऐसे नया साल मनाएंगे
रोते को हसाएंगे
नफ़रत की दीवार गिराएंगे
गर कर ना सके कुछ खास
बन नेक इंसान
इंसानियत जगाएंगे।
तोड़ तम की निशा को
चमका है प्रकाश नया
उम्मीदों का दामन थाम
जीवन पथ पर बढ़ते जाएंगे
रहे ना कोई बैर पुराना
ऐसे नया साल मनाएंगे
रोते को हसाएंगे
नफ़रत की दीवार गिराएंगे
गर कर ना सके कुछ खास
बन नेक इंसान
इंसानियत जगाएंगे।
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