Saturday, January 25, 2020

नमन

सहते है दर्द हर पल
नहीं आती माथे फिर भी पर कोइ शिकन
आसान नहीं फ़ौजी का जीवन
मिलते है जब सेना के तीन अंग
बन त्रिनेत्र निकाल देते हैं दुश्मन का दम
ठंड से कांप जाता है जब जनजीवन
करते हैं हिफाजत सजग प्रहरी बन
चिलचिलाती धूप हो या बारिश की बौछार
रोक ना पाए इनको कोई मौसम
खतरे में हो जब जीवन
बढ़ाते हाथ फरिश्ता बन
सौ को मारे एक जवान
हंसकर निछावर कर दे मातृभूमि पर प्राण
हर सांस तुम्हारी कर्जदार
तुम्हारे हर त्याग का आभार
करते हैं तुम्हारा वंदन
भारतीय सेना तुम्हें नमन

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