Friday, January 31, 2020

बसंत

पहन के पीली चुनर
निखर गया धरती का रंग
हर्षित हुआ तन मन
ऋतु ने ली अंगड़ाई
आया सुहावना वसंत
नव कोपलों से भर गया उपवन
कोयल सुनती गीत मधुर
खिल गई मंजरिया बहार बन
प्रकृति ने किया श्रृंगार नववधू बन
आ गया प्रीत का मौसम
ऐसे में छुप गए हो तुम कहां प्रियतम?
बिन तेरे जीवन हो जैसे पतझर
आ जाओ जिंदगी में बहार बन
ख़त्म हो पतझर
जीवन बने मधुबन।

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