Saturday, January 4, 2020

पिता

मां ने आकार दिया
तुमने संवार दिया
पड़ा जब भी गम का साया
सीने से लगा दुलार किया
छोड़ खुद की खुशी अधूरी
पूरी की हर ख्वाहिश मेरी
सपने को मेरे अपना बना लिया
हर शरारत पर मेरी लाड़ किया
न समझा बोझ कभी
ना की तुलना कभी
मुझ पर ही नाज़ किया
दर्द पर मेरे आंसू खुद ही बहा लिया
दे खुद कि हंसी हंसना सीखा दिया
सह कर हर गम रखा महफूज़
क्यों चले गए पापा तुम मुझसे दूर
जीवन है क्या समझ में आया
जब ना रहा तेरा साया
मिल जाए चाहे खुशी कोई
फिर भी ना होगी भरपाई तेरी
लेकर यादें तेरी करूंगी पूरी
हर चुनौती जिन्दगी की
साथ ना रहकर भी हो पास
मन को है ये विश्वास



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