Tuesday, March 10, 2020

गुजारिश

कल बीत गया
कल को देखा नहीं
बस आज में मेरे हो जाओ
जो ना  खेलो होली संग मेरे
बढ़ाए नारी का  श्रृंगार
बस वो एक रंग लगा जाओ
न करो बात तो कोई बात नहीं
बस मेरी आंखों को पढ़ जाओ
नहीं चाहिए  पत्थर का घरौंदा
बस अपने दिल में बसा जाओ
हार जाऊं सब कुछ मगर
बस तुम एक दिल हार जाओ।

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