Sunday, October 4, 2020

जिंदगी के रंग

 हंसाती है कभी, कभी रुलाती है जिंदगी

कभी पास कभी दूर ले जाती है जिंदगी

देकर उम्मीद कभी दामन छुड़ा देती  है जिंदगी

कभी अर्श कभी फर्श पर लाती है जिंदगी

कभी गैरों का साथ कभी अपनों से अलगाव लाती है ज़िंदगी

बुझाकर एक दिया कभी हजार दिए जलाती है जिंदगी

मुरझा कर मन की कली को कभी  बहार लाती है जिंदगी

समझ में ना आती पर समझाती है जिंदगी

मंजिल का पता नहीं पर उम्र भर चलाती है जिंदगी

नहीं कोई ठहराव रुक गई जो  खत्म हो जाती है जिंदगी

है शिक़ायत  तमाम फिर भी हंसी हैं जिंदगी

सबको है जिंदगी से प्यार

बीते उम्मीद में चाहे उम्र तमाम

तू ही बता जिंदगी तेरा क्या नाम?

चलती है उम्मीद पर

हां शायद उम्मीद ही जिंदगी का नाम।

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काश

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