Wednesday, October 7, 2020

शब्द

कहने को ढाई अक्षर
पर सिमटा इनमें संसार है
शब्द नहीं शब्द मेरे 
रूह की आवाज है
डूब जाऊ जो दुख के भंवर में
पार लगाए जो वो पतवार है
मेरी हंसी को जो दे खनक
वो थिरकता साज है
तेरी यादों को संभाला जिसने
वो आधार है
शब्द नहीं शब्द मेरे 
जीने का आधार है।

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