Friday, November 20, 2020

मगर

 माना कि विफलता

दिल तोड़ जाती है

मगर विफलता ही तो

सफलता की राह दिखाती है।


मुश्किलें राह भटकाती है

मगर मुश्किलों के पार ही

मंजिल मिल पाती है।

घोर निराशा में गम के 

गहराते बादल जो बरस जाते हैं

चीर कर निराशा की नीरवता

आसमानी उजाले का पट 

झट से खोल जाते हैं।



ना उम्मीदी जब मायूस करे

ना उम्मीदी ही फिर फिर

उम्मीद का फूल खिलाती है

जो हो हौसला बुलंद तभी तो

नन्ही चींटी पहाड़ चड़ जाती है।



3 comments:

  1. ना उम्मीदी ही उम्मीदों का फूल खिलाती है....
    वाह वाह क्या बात है......

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  2. बहुत सुंदर रचना है इसके लिए आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं लेखन कार्य जारी रहे मंजिल एक दिन तो अवश्य मिलेगी

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