Saturday, April 3, 2021

सीख रही हुं

 जीवन का नया सबक सीख रही हूं।

अकेले थी ,अकेले रहना सीख रही हूं।।

जिंदगी की राह में बहुत लड़खड़ाए ,

अब संभालना सीख रही हूं।

खुद से ,खुद में रहना सीख रही हूं।।

बहुत कर ली गैरो से मुहब्बत ,

खुद से प्यार करना सीख रही हूं।

रोक दिया आंसुओ को ,

अब मुस्कुराना सीख रही हूं।।

कल की परवाह नहीं करती अब ,

आज में जीना सीख रही हूं।

आंधियों में बिखर गए जो

उन तिनको को जोड़ रही हूं।।

बहुत चली इशारों पर ,

अब ,खुद से चलना सीख रही हूं।

बहुत कुछ सीखा जिंदगी में

अब जीना सीख रही हूं ।।

जीवन का नया सबक सीख रही हूं।

अकेले थी , अकेले रहना सीख रही हूं।।

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