Saturday, December 27, 2025

मुलाकात

 छोटी सी वो  मुलाकात दिल में समा गई

 दो पल का साथ प्यास बढ़ा गई। 

 खामोश थे लब मगर नज़रों ने बया कर दिया

  पास होकर भी दूर रहे यही दिल दूरी दिल को सुलगा गई।।


कहना था बहुत कुछ मगर वक्त का साथ न मिला

घड़ी की टिक टिक बेचैनी बढ़ा गई।

पास थे फिर जैसे सदियों की दूरी थी 

हाथों की अधूरी चाह हसरतों को दबा गई।।


न वादे थे न कसमें कोई

बस पलकों पर बात ठहर गई।

छूट गया साथ रह गई अधूरी आस

वो छोटी सी मुलाकात एक तड़प छोड़ गई।।


Thursday, December 25, 2025

इंतजार

 सोच कर तेरे बारे में गुजर जाती है रात

 नींद हो जाती है गुम दिल करता है इंतजार।


  मेरी हर शाम को है तेरी सुबह का इंतजार

  कब आएगा तेरा कल मेरे हर आज को है इंतजार।।


  मिलेगा जवाब कब मेरे हर सवाल को है इंतजार

  मिलेंगे अहसास को अहसास मेरे हर अहसास को है इंतजार।


   गुजर रही है उम्र सारी  न गुजरता इंतजार

   मेरे इंतजार को है इंतजार कब खत्म होगा ये इंतजार।।


   बढ़ रही मेरी बेकरारी को है सब्र का इंतजार

   तूफान में कश्ती को जैसे साहिल का इंतजार।।

   

   

Sunday, October 26, 2025

एक बार

खताएं की तुमने बार-- बार
माना नहीं पर एक बार।

झूठा प्यार दिखाया हर बार
सच्चा प्यार न किया एक बार।।

तय किए तेरे लिए जो फासले हजार बार
उन्हीं राहों में न किया इंतजार एक बार।

माना हर बात तुम्हारी
माना न तुमने मगर मेरी एक बात।।

तेरी राहों में फूल नहीं खुद को बिछाया बार -बार 
कांटे ही बिछाओ मेरी राहों में तुम भी एक बार।

आते हो सपनों में बार - बार
मिलना न सही पर करो इंतजार बस  एक बार।।



Thursday, October 9, 2025

जिंदगी बाकी है

 नई है दौलत सिक्को की खनक बताती हैं।

नोटो की गड्डियां भला कहां शोर मचाती है ?



आधी गागर छलक जाती है

भरी गागर राही की प्यास बुझाती है।।



है अभी नादान ठोकर की शिकायत बताती है।

सीखा जिसने जीने का हुनर

हर ठोकर उसको नया सबक दे जाती है।।


कमी है उड़ान में अधूरी उड़ान बताती है।

ऊंची उड़ाने हर ऊंचाई पार कर जाती है।।


है कोशिश में कमी हर हार बताती है।

कोशिश हो पूरी तो दुनियां बदल जाती है।।


कम है समय चिंता यही बताती है।

कर कोशिश लगातार एक पल में दुनिया बदल जाती है।।


मिला न कुछ खास चिंता यही सताती है।

जारी रख कोशिशें, जिंदगी अभी बाकी है ।।

Tuesday, September 30, 2025

तहजीब

 तहजीब में हम अदब से सर झुकाते हैं ।

मगरुर मगर अकड़ के निकल जाते हैं।।


इतराते है एक फूल पर महक दुनिया को बताते हैं ।

खुशबू से महका चमन हम यूँही छोड़ आते हैं।।


मचल जाते है बारिश की एक बूंद से दुनिया को दिखाते हैं ।

बूंदों की बारिशों में हम नहा के निकल जाते हैं।।


कांच के टुकड़ों को हीरो को ढेर बताते है।

न जाने कितनी दौलत  हम छोड़ आते हैं।।


पंख है नए नए अपनी उड़ान दिखाते है।

अपनी परवाजो से हम दुनियों नाप के आते हैं।।


सीखे है दो चार शब्द अभी खुद को जानकार बताते है।

सीख के जीवन का हर सबक हम तहजीब से सर झुकाते हैं।।

Monday, January 20, 2025

कमी

 रह गई थी कमी शायद कोई

 जो चाहा पा न सके

न तुम समझे न हम समझा सके।


न पा सके न भूला सके 

मूंद ली  आँखें मगर

ख्वाबों से  जुदा  न कर सके।


मिली बेरुखी हर बार मगर

एक बार प्यार न जता सके।


लुटाई थी दिल की दौलत जहां 

मेरे ग़म में एक आंसू न बहा सके।


दौड़ जाती थी  एक आवाज पर

आवाज दी जब उन्हें एक कदम न उठा सके।


हर पल दी खुशियां जिसे

एक मुस्कान भी न दे सके।


समझा था मैने ही गलत उसे

शिकवा नहीं कोई जो न समझा मुझे।

Thursday, October 3, 2024

रात

सुबह की रोशनी लाती है नई उम्मीदों की आस
 उम्मीदों को पंख दे जाती है रात
थक जाते है जब दिन में कर के काम
थकान को हटा दुलारती है रात।।

भागते है दिन भर सपनो के लिए करते हैं काम 
वही सपने दिखाती है रात
मिलते है दिन में चेहरे कई होती है पहचान
पर खुद से पहचान कराती है रात।।

होती है दिन में कई बातें कई लोगों से
पर खुद से खुद की बात करती है रात
हो मायूस सा दिन लगे न कुछ खास
कुछ  नया करने का जोश दिलाती है रात।।

काश

  ​नन्ही आँखों में थी सपनों की ऊँची उड़ान - प्यारी थी  ज़िंदगी - लबों पर मुस्कान ​थी हर कदम पर मुश्किले पर दिल को था एहसास, बदलेगी  दु...