गले लगने की हसरत दिल के कोने में दबाई है,
मगर अफ़सोस, आज फिर बीच में तन्हाई है।
तसव्वुर में तो रोज़ तुम्हें बाँहो में भरते हैं,
हक़ीक़त में मगर यादों की एक लंबी परछाई है।
हवा का झोंका जब गुज़रता है मेरे पास से,
लगता है जैसे तुमने चुपके से छुअन पहुँचाई है।
वो जो एक सुकून मिलता था तुम्हारी बाँहों में,
उसकी तलाश में मैंने अपनी नींद गँवाई है।
मिले जो मौका कभी, तो जी भर के लिपट जाऊँ,
अभी तो बस ख्यालों में तुम्हारी सूरत समाई है।