Friday, April 3, 2026

अनकही ख्वाहिश

 मिले जो साथ तेरा, मैं मुकम्मल हो जाऊं,

तेरी बाँहों में सिमट कर, मुसलसल हो जाऊं।

मेरे सूखे हुए होंठों पे तेरी बातों की मिश्री हो,

तू जो छेड़े मुझे, तो मैं ग़ज़ल हो जाऊं।

दुनिया की नज़रों से छुपा कर रखूँ तुझे ऐसे,

तू मेरा आईना बने और मैं तेरा अक्स हो जाऊं।

बड़ी बेचैन रहती है ये धड़कन तेरे बिन अक्सर,

तू थाम ले जो हाथ, तो मैं पल में बहल जाऊं।

महक उठती है मेरी रूह बस तेरे तसव्वुर से,

तू हकीकत में आए, तो मैं ख़ुशबू बन बिखर जाऊं।

Thursday, April 2, 2026

जिद

 मिले न चैन तुमको भी, ये ऐसी बेकरारी है,

तुम्हें पागल बनाने की अब मेरी जिद जारी है।

मेरी नजरों के घेरे से तुम बचकर जा न पाओगे,

तुम्हारी हर धड़कन पर अब हुकूमत मेरी भारी है।

मैं अपने अक्स को तेरी ही आँखों में सजाऊँगी,

तुझे अपना दीवाना करने की ये मुकम्मल तैयारी है।

खयालों में भी बस मेरी ही सूरत याद आएगी,

मोहब्बत में ये मेरी जीत, और तेरी हार प्यारी है।

मिटा दूँगी वो हर दूरी जो तेरे-मेरे बीच आए,

ये "मन" की जिद है जानम, जो सब पर अब भारी है।

Wednesday, April 1, 2026

अधूरी हसरत


गले लगने की हसरत दिल के कोने में दबाई है,

मगर अफ़सोस, आज फिर बीच में तन्हाई है।

तसव्वुर में  तो रोज़ तुम्हें बाँहो में भरते हैं,

हक़ीक़त में मगर यादों की एक लंबी परछाई है।

हवा का झोंका जब गुज़रता है मेरे पास से,

लगता है जैसे तुमने चुपके से छुअन पहुँचाई है।

वो जो एक सुकून मिलता था तुम्हारी बाँहों में,

उसकी तलाश में मैंने अपनी नींद गँवाई है।

मिले जो मौका कभी, तो जी भर के लिपट जाऊँ,

अभी तो बस ख्यालों में तुम्हारी सूरत समाई है।

Monday, March 30, 2026

अब जो हो सो हो जाए

 लगी है तुमसे ऐसी लगन, अब जो हो सो हो जाए

बदला है हमने अपना चलन, अब जो हो सो हो जाए


डरे थे हम कि रुसवा न कर दे ये जमाना हमें

छुपाकर रखा था ये तड़पन, अब जो हो सो हो जाए


हटा दिया है रुख से पर्दा और वहम की चादर भी

रहा न डर, न कोई अड़चन, अब जो हो सो हो जाए


बड़ी मुश्किल से लब खोले हैं, बातें अब बनाने दो

रुकी थी शर्म से ये धड़कन, अब जो हो सो हो जाए


कहो 'बेशर्म' या 'दीवाना', जो भी दिल में आए अब

हुए हैं हम तो तेरे अर्पण, अब जो हो सो हो जाए


जमाने से छुपे क्यों हम? छुपाना क्या? डरना क्या?

मिले जो तेरी बाहों के सावन, अब जो हो सो हो जाए

Tuesday, January 6, 2026

अनजाना रिश्ता

 ना है वो अपना ना पराया

 रिश्ते का कोई नाम नहीं 

  बस रिश्ता है अनजना

    

  झुकी नजरों से मुझे देखना

   सामने से नजर बचाना

    ना मिले तो ढूंढे बहाना।

  

     मिल कर भी हाल ए दिल छुपाना

     याद  है उसका ज़ख्म पर मरहम लगाना।


      चांद के बहाने दरिया किनारे मुझे निहार जाना

        सर्दियों की उन रातों में बस यूं ही कुछ दूर साथ जाना।


          हक़ीक़त हैं नहीं कोई अफसाना

          बस रिश्ते का नाम है अनजाना।

          है जो अपनो से भी खास

          सपनों से भी प्यारा।।

           


      

       

खाकी

 सिर्फ एक रंग नहीं है खाकी रंगों की शान है खाकी।

 जिसे पहन खड़ा हर सिपाही  रहता बलिदान को तैयार है।

  धूप, आंधी, भयंकर मौसम

 सीना तान चलता, पहन खाकी जो चलता है।

  न नींद से यारी,  आराम भी हराम है।

  सीमा हो या गालियां  खाकी हर जगह तैनात है।

   न्याय, कर्त्तव्य साहस का चलता फिरता पाठ है।

   मां की ममता, पत्नी का इंतजार  बच्चों की हंसी छूट जाती,

    पहन के खाकी हर चाहत पीछे रह जाती।

     सलाम है उस खाकी को जो चुपचाप सब सहती है

      हम सो पाते सुरक्षित क्योंकि खाकी  जगती है।।



Friday, January 2, 2026

ऐसा न हुआ

 हमने चाहा बहुत संभल जाना 

  पर हर बार ऐसा न हुआ।

  दर्द को शब्दों में ढाल लिया 

   मगर असर वैसा न हुआ।

    वो कहते थे लौट आयेंगे एक दिन 

     साल बदले मगर ऐसा न हुआ।

     हमने चाहा बस याद न आए कोई 

      दिल का ये इम्तिहान ऐसा नहीं हुआ।

       दर्द ने लिखना सिखा दिया 

        क्योंकि चुप रहना मुमकिन न हुआ।।

काश

  ​नन्ही आँखों में थी सपनों की ऊँची उड़ान - प्यारी थी  ज़िंदगी - लबों पर मुस्कान ​थी हर कदम पर मुश्किले पर दिल को था एहसास, बदलेगी  दु...