रहूंगा सदा तेरा
उसने था यही कहा।
उस वादे पर दिल हार गई
बिन सोचे ,उस पर सब वार गई।।
जिसके हर शब्द में था छलावा
प्यार नही, बस था दिखावा।
भोला दिल जान न पाया
असलियत उसकी, पहचान न पाया।।
कहा ,दूंगा साथ सदा
छोड़ा साथ ,दिया दगा।
रहूंगा सदा तेरा
उसने था यही कहा।
उस वादे पर दिल हार गई
बिन सोचे ,उस पर सब वार गई।।
जिसके हर शब्द में था छलावा
प्यार नही, बस था दिखावा।
भोला दिल जान न पाया
असलियत उसकी, पहचान न पाया।।
कहा ,दूंगा साथ सदा
छोड़ा साथ ,दिया दगा।
सहकर हर वार दे जीवन का वरदान
वह ढाल है पिता
भरकर हर रंग जो दे संवार
वह चित्रकार है पिता
अनगढ़ मिट्टी को जो दे आकर
वह कुम्हार है पिता
तपती धूप में भी शीतल कर दे
वह छांव है पिता
तपा कर मेहनत की आग में
जो दे सोने सा निखार
वह सुनार है पिता
सिखाए जो जीवन का पाठ
वह गुरु है पिता
सह दुखो की धूप
खिलाए जो बचपन का फूल
वह माली है पिता
देकर जीवन रहता जो मूक
न समझना उसको है भारी भूल
सांसों का आधार है पिता
शब्दो से परे ब्रम्हांड है पिता
उतर धारा पर देती जीवन का वरदान
पुण्यसलिला भागीरथी नाम महान
धोकर तन मन का मैल करती निर्मल
देवो से पूजित है गंगाजल
देती सबको जीवन का आधार
मां कहकर इंसान करता उसकी शुचिता पर प्रहार
तन धोया मन का मैल धो ना पाया
पाकर कर्मो का फल फिर भी समझ न पाया
जीवनदायिनी है जो जीवन का आधार
दूषित किया उसे लगा गंदगी का अंबार
किया प्रकृति से खिलवाड़
हिल गई दुनिया आया करोना काल
काटकर छीना जिनसे जीवन
मांगते अब उन्हीं से सांसे उधार
खोकर भी जीवन ना सुधरा उसका मन
महामारी में जो कुछ कर न पाया
बहाकर लाशे गंगा में संकट और बढ़ाया
बिलखती है गंगा देख विनाश की लीला
बच्चो ने ही मां की पवित्रता को छीना
खत्म हो गए जो जल,वायु, तो कैसे जी पाएगा?
मानवता की हत्या का पाप कौन उठाएगा?
भावी पीढ़ी को क्या यही सौगात दे जायेगा?
जीना है फिर से तो इंसानियत सीखो
पेड़, पौधे, हवा, धरा,सब को सिंचो
जो प्रकृति की गोद में जायेगा
आरोग्यता का वरदान वही पाएगा।
बिजली चमके, मन तरसे
बादल कड़के , दिल धड़के
अनकही चाहत से दिल मचले
बाहर बादल बरसे
अंदर दो नैना तरसे
जाने कब हो ऐसी बरसात
भींगने का मिले सौगात
भींगे तन मन हर्षे
हौले हौले जब बरसे
बीते साल दर साल
नहीं भींगी, है ये मलाल
होगी उनसे मुलाकात
जाने कब होगी वो बरसात?
चाहता है दिल आज
कि उड़ जाऊं उन्मुक्त गगन में ।
भर लूं तुम्हें बाहों में
या छुपा लूं निगाहों में।।
हो बातें तमाम निगाहों से
उतार लूं तेरी धड़कने
दिल की गहराई में
मिटा लूं मन की थकान
आगोश की अँगडाई में।
सदियों की प्यास बुझा लूं एक लम्हे में
प्यासी थी जिंदगी मिटा लूं प्यास कतरे कतरे से
नन्ही आँखों में थी सपनों की ऊँची उड़ान - प्यारी थी ज़िंदगी - लबों पर मुस्कान थी हर कदम पर मुश्किले पर दिल को था एहसास, बदलेगी दु...