मन से मन का रिश्ता है ऐसा
जिस्म का रूह से रिश्ता है जैसा
धड़कन रूक गयी
तो दिल धड़क न पायेगा
छूट गया जो मन से
मन का साथ
जुदा होकर मन से
मन कहॉ जायेगा?
दूरियों की खाई हो
जितनी भी गहरी
मन का दरिया
मन के सागर में
ही समा जायेगा
जिस्म का रूह से रिश्ता है जैसा
धड़कन रूक गयी
तो दिल धड़क न पायेगा
छूट गया जो मन से
मन का साथ
जुदा होकर मन से
मन कहॉ जायेगा?
दूरियों की खाई हो
जितनी भी गहरी
मन का दरिया
मन के सागर में
ही समा जायेगा
जुदा होकर मन से, मन कहाँ जायेगा........
ReplyDeletevery good line written
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