Tuesday, February 19, 2019

याद

याद इस कदर आती है
जिस्म से रूह को
बेजार किये जाती है।
खुली आँखे  वीरान  है
सांसे भी चल रही है
थम थम कर
कही रूक ना जाए धड़कन
रहकर मुझमे ही
क्यों सता रहे हो?
तुम ही बता दो
इतना याद क्यों
आ रहे हो ?

3 comments:

  1. Yaad ka aana accha h .
    right said

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  2. “जिस्म से रुह बेजार किये जाती है”
    वाह जी छा गये.....

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