याद इस कदर आती है
जिस्म से रूह को
बेजार किये जाती है।
खुली आँखे वीरान है
सांसे भी चल रही है
थम थम कर
कही रूक ना जाए धड़कन
रहकर मुझमे ही
क्यों सता रहे हो?
तुम ही बता दो
इतना याद क्यों
आ रहे हो ?
जिस्म से रूह को
बेजार किये जाती है।
खुली आँखे वीरान है
सांसे भी चल रही है
थम थम कर
कही रूक ना जाए धड़कन
रहकर मुझमे ही
क्यों सता रहे हो?
तुम ही बता दो
इतना याद क्यों
आ रहे हो ?
Yaad ka aana accha h .
ReplyDeleteright said
“जिस्म से रुह बेजार किये जाती है”
ReplyDeleteवाह जी छा गये.....
Vow...
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