Tuesday, February 19, 2019

उदासी

था कल चाँद बादल  में
चांदनी के साथ
आज मगर लग रहा उदास
चमन में थी बहार ही बहार
आज मगर गुलशन भी वीरान
रास्ते  थम से  गये
तन्हाई से फिर भी आती है
उसकी आवाज
साथ होकर  भी
ना साथ था इतना
दूर जाकर तड़पा
रहा  जितना
हर शै हर मंजर उदास है
सबकी आँखो  मे  उसकी ही
प्यास है ।



2 comments:

  1. तन्हाईसे फिर भी आवाज आती है......👌

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  2. one should never be sad .
    lime are very heart touching

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