Monday, January 6, 2020

बेटी

घर की शान है बेटी
जिंदगी की मुस्कान है बेटी
शिक्षा,साहस धैर्य से सींचो
फिर तो बेटो से भी गुणवान है बेटी
एक कुल नहीं
दो कुलो की शान है बेटी
हर मुसीबत पार कर
मान बढ़ाए बेटी
आ जाए जो मुसीबत कभी
हर चुनौती से जूझ जाती है बेटी
बेटी के जन्म पर मुरझा  क्यों  जाते हो?
जन्म से प्रतिभा पर सवाल लगाते हो?
भार नहीं प्रकृति का वरदान है बेटी
देख सफलता किसी और की
उलाहना दे जाते हो
पर पीछे हाथ है किसी मां बाप के तप का
वो क्यों नहीं देख पाते हो
छोड़ शिकायत स्वागत करो धरा पर
हो अभिमान उन्हें भी तुम पर।



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काश

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