Tuesday, October 13, 2020

तेरे इंतजार में

 तेरे इंतजार में बातें खुद से तमाम कर लेती हूं

कभी लिखती हूं कभी गुनगुनाती हूं

सवार कर खुद को दर्पण निहार लेती हूं

हर दिन अगले दिन का इंतजार कर

कम हो रही है दूरियां कितनी  हिसाब कर लेती हूं

हर लम्हा हो तेरा खुशगवार

हर इंतजाम कर लेती हूं

मिलन की हर घड़ी संजो मन में रख लेती हूं

जाकर आओगे फिर इस इंतजार में 

मन को तेरी यादों से भर लेती हूं।



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