धड़कनों की सदा में, एक अनकही बात हो,
जिस्म की चाह न हो, बस रूह का साथ हो।
लग कर तेरे गले सिमट जाए ये सारी कायनात,
लम्हा सदियों में ढले ऐसा साथ हो ।
न हो जहां शिकवे, न कोई ख़ौफ़ की बात
बेइंतहा यक़ीन और पाक जज़्बात हो।
एक लम्हे में बुझ जाए बरसों की प्यास,
जब दिल से दिल की मुलाक़ात हो।
'मन' को तलब रहे बस तेरी पनाह की,
इस पाक मोहब्बत की न कभी हार हो।
मोहब्बत इक पाकीज़गी का नाम है
ReplyDeleteफ़ना हो जाना दीवानों का काम है ।
मोहब्बत कर के देखो तो जानो
मोहब्बत हसीन जिंदगी का ईमान है।।