Wednesday, November 13, 2019

बचपन

सुबह की हड़बड़ी
रात का सन्नाटा
याद बहुत आता है
बचपन सुहाना
दिन के राजा थे
रातों के शहंशाह
हर खुशी पर
हक था हमारा
है जिंदगी में अब
सब कुछ मगर
ना रहा खुद पर
कोई हक हमारा
याद बहुत आता है
बचपन सुहाना।

Monday, November 11, 2019

फतह

टूट कर जो संवर गई
 वह चट्टान हूं
तप कर  बना जो
वह सोने का हार हूं
टूट कर डाली से भी
खिल गया जो
वह गुलाब हूं
हर चोट से मजबूत बने जो
वह फौलाद हूं
हजारों मील तय  करके
मिले जो सागर में
वह नदी की धार हूं
दर्द में डूब कर
लिखे जो शायरी
वो कलम की धार हूं
हैरान ना हो ए जिंदगी
तेरे हर दर्द को
हथियार बना कर
तुझसे हर जंग फतह
को तैयार हूं

Saturday, November 9, 2019

जिंदगी

लम्हा लम्हा गुजरती है जिंदगी
आधी हकीकत में आधी फसाने में
कभी रूठने में कभी मनाने में
कभी जानने में कभी जताने में
छूटता रहता है वक्त का दामन
फिसलता है समय का मोती
रिश्ते जोड़ने में निभाने में
गुजरती है उम्र सारी
लोगो को पहचान पाने में
कभी टूट कर जुड़ जाने में
कभी जुड़ कर टूट जाने में
बचती  है जो उम्र थोड़ी
वह भी निकल जाती है
क्या खोया क्या पाया?
हिसाब लगाने में।



Thursday, November 7, 2019

दर्द

दर्द का जिंदगी से रिश्ता है खास
दर्द सहकर कर ही मिलता है जिंदगी का साथ
दर्द ही कराता है रिश्ते की पहचान
सुख है घड़ी दो घड़ी
दर्द ताउम्र साथ निभाता है
दर्द के बादल में छुप कर ही
सुख का सूरज चमक पाता है
ना होना मायूस दर्द से कभी
दर्द आकर कुछ दे जाता है
सुख जाकर सब लिए जाता है

Saturday, November 2, 2019

चेहरा

एक चेहरे पर कई चेहरे छुपाते हैं लोग
जाने दूसरों से या खुद से
खुद को छुपाते हैं लोग
रख कर मन में जहर
कानों में रस घोल जाते हैं लोग
एक चेहरे पर कई चेहरे लगा ते हैं लोग
खुशियां देने के बहाने रुला जाते हैं लोग
मरहम लगाया जिसने जख्म पर कभी
उसी हाथ को जख्मी कर जाते हैं लोग
बुरी है दुनिया बहुत कह कर
खुद  बुरा कर जाते हैं लोग
कुछ यादें कुछ सबक
छोड़ जाते हैं लोग
देखना गौर से हर चेहरे को कई बार
क्योंकि एक चेहरे पर कई परत लगाते हैं लोग

Saturday, August 24, 2019

देह

नारी हूं पर सिर्फ देह नही
प्यार का सागर हूं पर
विलासिता का साधन नही
नैनो मे बस क्यों देखी मधुशाला
इनमे ही रहती है करूणा की धारा
लबों को छूने की है  बेकरारी
पर  क्यों न सुन पाये
इनकी अनकही कहानी
मंदिरों में नारी के जयकारे लगाते हो
फिर नारी देख मचल क्यों जाते हों?
ऋंगार नही आधार हूं
नजरिया बदल के देखो
भार नही
तुम पर उपकार हूं।




Friday, August 16, 2019

साथ

आसान राहों में
मिल जाते है हमराही कई
पथरीले रास्तों में
नजर नही आता कोई
खिलते  गुलशन  के
बागबां है सभी
पतझड़ का
रखवाला नही कोई
महफिलों के साथी सभी
तन्हाई में साथ छूट जाते  है सभी
खुशियो से  नही
गमों से  भी
जो करें प्यार
वही है सच्चा साथ

काश

  ​नन्ही आँखों में थी सपनों की ऊँची उड़ान - प्यारी थी  ज़िंदगी - लबों पर मुस्कान ​थी हर कदम पर मुश्किले पर दिल को था एहसास, बदलेगी  दु...