सुबह की हड़बड़ी
रात का सन्नाटा
याद बहुत आता है
बचपन सुहाना
दिन के राजा थे
रातों के शहंशाह
हर खुशी पर
हक था हमारा
है जिंदगी में अब
सब कुछ मगर
ना रहा खुद पर
कोई हक हमारा
याद बहुत आता है
बचपन सुहाना।
रात का सन्नाटा
याद बहुत आता है
बचपन सुहाना
दिन के राजा थे
रातों के शहंशाह
हर खुशी पर
हक था हमारा
है जिंदगी में अब
सब कुछ मगर
ना रहा खुद पर
कोई हक हमारा
याद बहुत आता है
बचपन सुहाना।