Thursday, October 6, 2022

साथ चलो

 कौन जाने किसकी मंजिल है कहां

 कल हम यहां तुम वहां।।

 माना मंजिले है जुदा

मगर चंद कदम तो साथ चलो

खोलना ना दिलों के राज मगर

मगर अश्कों के हमराज बनो।।

न करना इजहार ए मोहब्बत कभी

चुभते है जो दिल में दे देना वो कांटे सभी।।

ना भि गाना हंसी की फुहार से 

भिंगा लेंगे दामन हम अश्कों की धार से।।

फूलों की राह में चुनना हमसफर

मिल जाए जो कांटे

तो बस करना खबर

कर खुद को जख्मी 

बचा लेंगे कांटो के हर वार से।।










Thursday, September 29, 2022

आरजू

 मिटा दी हर तस्वीर तेरी

मुसुकुराती है दिल में मगर सूरत तेरी।

भुला दिया हर याद को 

रह रह कर जो याद आए

कैसे भूलूं उन बातों को?।।

वो जाहिर है लफ्जों में मेरे

मै गुमनाम सी खामोशियों में तेरे।

कैसे कहूं की क्या सहते है?

तेरे बगैर भी हम तेरे ही रहते हैं।।

क्या बताऊं किस किस कदर खास हो तुम

साथ नही फिर भी पास हो तुम।।

मांगा कहां कुछ तुमसे ज्यादा है?

रूठ जाऊं तो मना लेना बस यही इरादा है।।






Wednesday, July 27, 2022

तुम जो मिल गए

 जब से तुम मिल गए

रांहो में गुल खिल गए

भंवर में थी जिंदगी साहिल मिल गया

मिले जो तुम सारा जहां मिल गया।।

रहो ना दूर न यू खफा हो

किस्मत से मिले हो ना जुदा हो

तुम क्या जानो तुम क्या हो

मीठा सा नगमा, सुरीली सी तान हो।।

मेरी तन्हाई के हमराही, धूप में छांव हो

खोए खोए से थे तुम, तन्हा सी मैं भी

मिला है दिल को जब से तेरा सहारा

खिल सी गई जिंदगी,बेहतर लगे हर नजारा।।

Sunday, July 24, 2022

बेखबर

 पलको के चिलमन से देखा जो उसे

फासले बहुत नजर आए

मूंद ली जो पलके 

मन में बस वही नजर आए

चैन मेरा खोने लगा है।

मेरा वो जबसे होने लगा है।

देखकर उसे सुकून आ जाता है।

भीड़ में तन्हाई में बस वही नजर आता है

जब से उसके प्यार में रंगी हूं

नीद में जागी और जाग कर सोई हूं।

Saturday, July 23, 2022

अधूरा इंकार

 निगाहों से कर के इजहार

जुबां से मुकर क्यूं जाते हो?

रहते हो दिल में मेरे

घर कही और क्यों बताते हो?

नही है प्यार कह के

प्यार क्यों दिखाते हो?

जाऊं जो दूर पास

बुलाते हो क्यों?

परवाह नहीं कोई जाए चला

कहकर परवाह क्यों दिखाते हो क्यों?

परवाह नहीं जब टूटे दिल की कोई

तोड़ कर दिल मरहम क्यों लगाते हो ?

रखनी है जो दूरी

फिर सपनो में क्यों आते हो?

तोड़ हर रिश्ता

रिश्ता नया कौन सा बनाते हो?

Friday, July 22, 2022

नादान

 जाना चाहूं जो दूर और पास आ जाती हूं

बंधन नही कोई मगर बिन डोर खींची जाती हूं

छुपाना था हाल ए दिल मगर

नजरे हर राज बया कर जाती है

हो गई हूं दिल से मजबूर इस इस कदर

करना चांहू कुछ मगर कुछ कर जाती हूं

समझाती हूं खुद को मगर

आए जाता है जब नाम तेरा

नासमझ बन जाती हूं

कर लेंगे खुद को हर यादो से दूर

सोच फिर से तेरी यादों में खो जाती हूं।

Monday, May 30, 2022

कुछ और बात होती

 निगाहों में  केवल बसाया मुझे बस,

दिल में बसाते तो कुछ और बात होती।


दो घूंट पिलाकर तो चाहत बढ़ा दी,

प्यास पूरी बुझाते तो कुछ और बात होती।


सराहा जिस्म की खूबसूरती को केवल,

मन को भी देख पाते तो कुछ और बात होती।


चले दो कदम साथ मेरे मगर तुम,

हमसफर  बन जाते तो कुछ और बात होती।


वादा कभी  कोई था ही नहीं पर

साथ मेरा निभाते तो कुछ और बात होती।


समझ ली अनकही मेरी बातें भी लेकिन,

जो कहा, समझ जाते तो कुछ और बात होती।



समझा तुमने सारे ज़माने को बेहतर,

मुझको भी समझ पाते तो कुछ और बात होती।

काश

  ​नन्ही आँखों में थी सपनों की ऊँची उड़ान - प्यारी थी  ज़िंदगी - लबों पर मुस्कान ​थी हर कदम पर मुश्किले पर दिल को था एहसास, बदलेगी  दु...