पर सिमटा इनमें संसार है
शब्द नहीं शब्द मेरे
रूह की आवाज है
डूब जाऊ जो दुख के भंवर में
पार लगाए जो वो पतवार है
मेरी हंसी को जो दे खनक
वो थिरकता साज है
तेरी यादों को संभाला जिसने
वो आधार है
शब्द नहीं शब्द मेरे
जीने का आधार है।
नन्ही आँखों में थी सपनों की ऊँची उड़ान - प्यारी थी ज़िंदगी - लबों पर मुस्कान थी हर कदम पर मुश्किले पर दिल को था एहसास, बदलेगी दु...
सत्य...सुंदर रचना👍👍👍
ReplyDeleteThanks
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