Tuesday, October 13, 2020

अलग

बामुश्किल जोड़ा जो टूट रहा है
पास आते आते कोई दूर हो रहा है
जागती आंखों से देखा था जो ख्वाब
अब नींद में भी टूट रहा है
न रहकर जो चलते थे साथ
अब सामने से भी वो छूट रहा है
रहकर मन में कोई मन से दूर कर रहा है
आना था पास मगर दूर हो रहा है
चाहत थी जुड़ने की मगर
मालूम नहीं ये क्यों हो रहा है?
लो बंद कर ली आंखे मगर
तेरा दीदार क्यों हो रहा है?
चाहा था क्या, क्या हो रहा है?
दूर जाना है तो चले जाओ
सताए जो याद मेरी 
ना होना हैरान ये क्या हो रहा है?

3 comments:

  1. Your writing is beautiful. I look forward to it.

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  2. संवेदनापूर्ण, सुंदर रचना👍

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  3. शब्दों में आत्मिक गहराई है...शानदार

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काश

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