Tuesday, September 30, 2025

तहजीब

 तहजीब में हम अदब से सर झुकाते हैं ।

मगरुर मगर अकड़ के निकल जाते हैं।।


इतराते है एक फूल पर महक दुनिया को बताते हैं ।

खुशबू से महका चमन हम यूँही छोड़ आते हैं।।


मचल जाते है बारिश की एक बूंद से दुनिया को दिखाते हैं ।

बूंदों की बारिशों में हम नहा के निकल जाते हैं।।


कांच के टुकड़ों को हीरो को ढेर बताते है।

न जाने कितनी दौलत  हम छोड़ आते हैं।।


पंख है नए नए अपनी उड़ान दिखाते है।

अपनी परवाजो से हम दुनियों नाप के आते हैं।।


सीखे है दो चार शब्द अभी खुद को जानकार बताते है।

सीख के जीवन का हर सबक हम तहजीब से सर झुकाते हैं।।

Monday, January 20, 2025

कमी

 रह गई थी कमी शायद कोई

 जो चाहा पा न सके

न तुम समझे न हम समझा सके।


न पा सके न भूला सके 

मूंद ली  आँखें मगर

ख्वाबों से  जुदा  न कर सके।


मिली बेरुखी हर बार मगर

एक बार प्यार न जता सके।


लुटाई थी दिल की दौलत जहां 

मेरे ग़म में एक आंसू न बहा सके।


दौड़ जाती थी  एक आवाज पर

आवाज दी जब उन्हें एक कदम न उठा सके।


हर पल दी खुशियां जिसे

एक मुस्कान भी न दे सके।


समझा था मैने ही गलत उसे

शिकवा नहीं कोई जो न समझा मुझे।

Thursday, October 3, 2024

रात

सुबह की रोशनी लाती है नई उम्मीदों की आस
 उम्मीदों को पंख दे जाती है रात
थक जाते है जब दिन में कर के काम
थकान को हटा दुलारती है रात।।

भागते है दिन भर सपनो के लिए करते हैं काम 
वही सपने दिखाती है रात
मिलते है दिन में चेहरे कई होती है पहचान
पर खुद से पहचान कराती है रात।।

होती है दिन में कई बातें कई लोगों से
पर खुद से खुद की बात करती है रात
हो मायूस सा दिन लगे न कुछ खास
कुछ  नया करने का जोश दिलाती है रात।।

Monday, September 30, 2024

अपना

 कुछ दूर हुए,  कुछ का छूटा साथ

बिखर गए वो रिश्ते था जिन पर

नाज।

सपने में भ्रम था या भ्रम में सपना

हुए पराए सभी माना जिसे अपना।।


है छलावा या हसीन सपना

लगता है जब कोई अपना

लगती है ठोकर, खुल जाती आंख, नजर नहीं आता कोई

याद रह जाता है बस सपना।।


उड़ जाती है नीद याद आता है हर वो चेहरा, थे कभी जो साथ

माना था जिन्हें दिल ने अपना।।



खोकर खुद को कहना किसी को अपना, जैसे होश हवास में खुद को छलना।।



पाओ खुद को बनाओ अपना 

होंगे पूरे हर ख्वाब, नही छूटेगा कोई साथ, ना टूटेगा कोई सपना।।

Thursday, September 26, 2024

ये जिंदगी

 डरते हैं सभी मौत से,

पर आसान  कहां है जिंदगी?

कभी फूलों की सेज, कभी कांटो का ताज है जिंदगी।।


जिंदगी है सबके लिए

पर एक समान नही जिंदगी

हिम सी शीतल कही

कही अंगारों की ताप जिंदगी।।


चले कुछ कदम है बहार जिंदगी

 थक जाते चलते चलते पर और चलाती है जिंदगी।।


है शिकायत ही शिकायत जिंदगी

मगर है फिर भी सबसे खास जिंदगी क्यों की उलझनों को सुलझाना सिखाती है जिंदगी।।


होती है कुछ को आराम कुछ को काम जिंदगी पर काम से ही पहचान दिलाती हैं जिंदगी।

रुकना नही कभी दुश्वारियों से 

दुश्वारियों से जीत जाना है जिंदगी।

Saturday, July 6, 2024

हम कहीं तुम कहीं

 चलना था साथ, चले भी मगर

हम कही तुम कही।


चाहा था साथ , मिला एक कोना

मगर दिल में नही।


था इंतजार दोनो को

मगर बेकरारी एक सी नही।


मांगा था प्यार, मिले जख्म ही

 मगर शिकन तक नही।


हसरत थी भींगाए बरसात हमें 

मगर अब तुम कही हम कही।


बदल गए है रास्ते, जुदा है मंजिले

मगर यादों में  है साथ क्यों मालूम नही।

Sunday, May 5, 2024

सोचा न था

 निगाहों से दिल में उतरकर

यूं चला जाता है कोई

सोचा न था।

साथ चलते चलते  अचानक

यूं छोड़ जाता है कोई 

सोचा न था।


बनकर करार बेकरारी

दे जाता है कोई

सोचा न था।


बनकर चाहत नफरत दे जाता है कोई 

सोचा न था।


थी जिसके एक झलक की बेताबी

उस से निगाह बचाएगा कोई

सोचा न था।


बनकर अपना बेगाना बना जाता है कोई 

सोचा न था।


माना था हमसफर जिसे

वो अजनबी हो जायेगा

सोचा न था।।

काश

  ​नन्ही आँखों में थी सपनों की ऊँची उड़ान - प्यारी थी  ज़िंदगी - लबों पर मुस्कान ​थी हर कदम पर मुश्किले पर दिल को था एहसास, बदलेगी  दु...