सहते है दर्द हर पल
नहीं आती माथे फिर भी पर कोइ शिकन
आसान नहीं फ़ौजी का जीवन
मिलते है जब सेना के तीन अंग
बन त्रिनेत्र निकाल देते हैं दुश्मन का दम
ठंड से कांप जाता है जब जनजीवन
करते हैं हिफाजत सजग प्रहरी बन
चिलचिलाती धूप हो या बारिश की बौछार
रोक ना पाए इनको कोई मौसम
खतरे में हो जब जीवन
बढ़ाते हाथ फरिश्ता बन
सौ को मारे एक जवान
हंसकर निछावर कर दे मातृभूमि पर प्राण
हर सांस तुम्हारी कर्जदार
तुम्हारे हर त्याग का आभार
करते हैं तुम्हारा वंदन
भारतीय सेना तुम्हें नमन