Monday, March 4, 2024

क्यों

 निभाना नही था जब वादा कोई

झूठी कसमें क्यूं खाते हो?

पास आए नही हम 

और तुम छोड़ जाते हो?


जाना था दूर तक मगर

दो कदम पर साथ छोड़ जाते हो?

नहीं है जब कोई अहसास

खास क्यूं बताते हो?


  हर वफा का इनाम

   जफा क्यूं दे जाते हो

    बुझानी ही थी लौ अगर

    पास आकर हवा क्यूं दे जाते हो?


कर के सब चालाकियां

नादान क्यूं बन जाते हो?

बांट देते हो खुद को सब में मगर

बस मेरे हिस्से में काम क्यूं आते हो?

बेचैन

 चांद में चांदनी है जैसे

फूलों में रंग है वैसे

कोयल की कूक

बरसात में जैसे।


लगे सुहावन मन को ऐसे

ठंड में सर्दी की धूप जैसे

बेचैन हो तूभी कभी ऐसे

चाहे तुझे कोई मेरे जैसे।

उम्मीद

 मंजिल वहीं है, पर रास्ते बदल गये।

जाने कब उम्मीद के सूरज ढल गये।


बंद कर ली है आंखे मगर

सपनों में आना छूटा नही है ।


गहरी है चोट, गहरा असर है

कैसे कहूं दिल टूटा नही है।



छुड़ा लिया उसने दामन मगर

दिल का धागा टूटा नहीं है।


बदल गये हैं वो आजकल

पर बहुत कुछ छूटा नहीं है।


बदला वक्त, हम दूर तक निकल गये।

जाने कब उम्मीद के सूरज ढल गये।

- *मंजरी*

Sunday, November 19, 2023

तलब

 चाहत थी जिसमे कभी डूब जाने की

   है तलब उस किनारे से दूर जाने की।


   जिस चेहरे से हटती नही थी निगाहें

    कोशिश है उस चेहरे को भूल जाने की।


    जिन रांहो पे चलने की रही बेताबी

     कोशिश है उन राहों से बच के जाने की।


     वजह थी जो कभी मुस्कुराने की 

      बन गई वजह खुद को रुलाने की।


       यादें जो वजह थी खुश हो जाने की 

       जारी है कोशिश उन्हें मिटाने की।।

Friday, November 10, 2023

चलते जाना

 माना नामुमकिन है वक्त को रोक पाना

बहते समय की धार को कहीं मोड़ पाना।


करें उदास जब जिंदगी की राहें

कुछ देर ठहरना, बचपन में खो जाना, वो रूठना,वो मानना

वो झगड़कर भी साथ खाना।


वो सखियों की मनुहार, वो टीचर की डांट। भूलकर सब अगले ही पल

फिर से नई शरारत कर जाना।


वो दशहरे का त्योहार

और खुशियां हजार

होली के रंगों से रंगना

नए कपड़े पहन शाम को निकलना 

चंद रुपयों में जहां की

खुशियां समेटना।


ना भविष्य की चिंता 

ना भूत का पछतावा

खुश रहना बस आज में

एक-एक सीढ़िया चढ़ते जाना।


वो मां का दुलार

पापा की फटकार

वो पुरानी गलियां, वो पुराना मकान

हैं बस यादें मगर, यादों में ही ठहर जाना।


चलेगा वक्त मगर,

वो बचपन फिर ना आयेगा,

वो खुशियां न दे पाएगा, 

फिर भी चलते जाना,

फिर भी चलते जाना ़़़़़़़।

- *मंजरी*

Friday, October 27, 2023

कुछ नया

 


 चलो जिंदगी ये नया करते हैं।

बेवफा को यादों से रिहा करते हैं।


जो खुश हैं हमारे बिना  उनको,

अपनी यादों से जुदा करते हैं।


गैरों से कर ली मोहब्बत बहुत,

अब खुद से प्यार, याखुदा करते हैं।


वो अपने, जो ताउम्र सपने  रहे,

नींद में ही, उन्हें क्यों छुआ करते हैं।


वो अपनी खता से बाखबर मंजरी,

फिर भी  बारहा खता करते हैं।

 *-मंजरी*

Friday, September 29, 2023

नफरत

 कहते हैं नफरत के एक पल में, प्यार के कई साल भूल जाते हैं।


बनकर अश्क  प्यार के हर वो पल आंखो से आज भी निकल जाते हैं।।



भरी धूप हो या बारिश का मौसम,

मिलने का  इंतजार  हरदम

उसका एक बार बुलाना,

सब छोड़ कर मेरा चले जाना।

रास्ते की मीनार, वो चौराहे का मकान, दाएं मुड़ कर बस रुक जाना।।




याद है अब भी खुद को ना रोक पाना,

तेज सांसों के साथ जीने पर चढ़ते जाना।

खुलते दरवाजे के साथ उस से लिपट जाना।।


छेड़ कर मुझे फिर उसका प्यार दिखाना,

उसकी बस इसी अदा पर मेरा दिल हार जाना।

खोकर उसमें खुद को पा जाना।

याद है सब ऐसे जख्म ताजा हों जैसे।


कैसी है ये नफरत जिसमें 

दूर होकर भी है इंतजार।

याद है उसकी बेवफाई भी मगर,

दिल को तड़पाता है  सिर्फ उसका प्यार।।

काश

  ​नन्ही आँखों में थी सपनों की ऊँची उड़ान - प्यारी थी  ज़िंदगी - लबों पर मुस्कान ​थी हर कदम पर मुश्किले पर दिल को था एहसास, बदलेगी  दु...